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माहरा जाति में मात्रात्मक त्रुटि नहीं, एक पृथक जाति है—बिचेम

पूर्व संभागीय अध्यक्ष बिचेम पोंंदी ने मीडिया को जारी किया बयान.

सुकमा. माहरा समाज के पूर्व संभागीय अध्यक्ष बिचेम पोंंदी ने कहा कि आदिवासी माहरा समाज बस्तर संभाग में एक सशक्त संगठन है. माहरा समाज बस्तर संभाग ने अपनी मूल मांग अनुसूचित जनजाति के अनुसूची में शामिल करने के मांग को लेकर बस्तर संभाग में आंदोलन करने के अलावा छग राज्य विधानसभा का घेराव तक कर चुका है, आंदोलन के दौरान समाज के बहुत से साथियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत भी किया गया है, अभी समाज के सदस्य न्यायालय में अपने विरूद्ध संस्थित अपराधिक प्रकरण का सामना विचारण न्यायालय के समक्ष कर रहे हैं.

श्री पोंदी ने कहा माहरा समाज को कमजोर करने व समाज के वोट बैंक के कारण आपस में समाज के सदस्यों को पार्टियों में भी बांटा गया है, माहरा समाज विगत 30 वर्षों से अविभाजित मप्र व छग राज्य के पूर्ववर्ती सरकारों के झूठी आश्वसनों से लगातार छलता गया है. छग राज्य में विपक्ष की भूमिका में रहने के दौरान वर्तमान सरकार के सभी विधायक, सांसद व मंत्रीगण सत्ता में काबिज होने पूर्व समाज के मांग के साथ खड़े रहे है. हमें उम्मीद है कि समाज के मांग पर कांग्रेस राज्य सरकार सकारात्मक निर्णय लेगी और समाज का भला करेगी.

माहरा समाज संगठित है…
माहरा समाज गुटों में बंटे होने का भीे भ्रम उलगत नीति के लोगों ने ही फैलाया है, माहरा समाज का संगठन एक था, एक है और हमेशा एक ही रहेगा. माहरा समाज को एक तो 31 मार्च 1949 एवं 8 दिसम्बंर सन् 1950 के गजट से गायब किया गया है, इस कारण संवैधानिक सूची में अब तक जुड़ा नहीं पाया गया है, जब हम अपने हक-अधिकार की आंदोलन कर रहे हैं तो सरकारें अपनी गलतियों को छुपाने माहरा जाति में मात्रात्मक त्रुटि होने का छग राज्य के पूर्ववर्ती सरकार ने सम्पूर्ण माहरा जाति को ही समूल खत्म करने का आदेश किया है और कहा कि माहरा कोई अलगत जाति नहीं हैं बल्कि महार जाति का पर्यायवाची जाति है. इस निर्णय का समाज ने घोर आपत्ति व्यक्त करते हुए विरोध किया है और अभी भी विरोध जारी रखा है.

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